मधुमेह और शीत ऋतु
मधुमेह में शरीर से प्रोटीन की हानि की पूर्ति करने का सबसे अच्छा समय सर्दियों का मौसम होता है, क्योंकि प्रोटीन के सभी स्रोत एवं स्वयं प्रोटीन गरिष्ठ पदार्थों की श्रेणी में आते हैं। जैसे सभी प्रकार की दालें, सूखे मेवे विशेषकर काजू, बादाम, अखरोट, मूँगफली आदि ऐसे भोज्य पदार्थ हैं, जिनका उचित पाचन सिर्फ जाड़े के मौसम में ही हो सकता है।मधुमेह रोगियों को इस मौसम का भरपूर उपयोग करते हुए प्रोटीनयुक्त पदार्थों का सेवन करना चाहिए। प्रोटीनयुक्त पदार्थों के सेवनकाल में कसरत और पैदल भ्रमण करने से शरीर पुष्ट होता है, जिससे कमजोरी दूर होती है। अतः इस मौसम में भी हल्के व्यायाम और सुबह-शाम पैदल सैर करना बेहद लाभदायक होता है।
मधुमेह रोग में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से रोगी को अनेक तकलीफों का सामना करना पड़ता है। अतः मधुमेह रोगियों के लिए सर्दियों के मौसम में आंवला, हल्दी, कालीमिर्च, तुलसी जैसी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली वस्तुओं का उपयोग लाभकारी होता है। इस रोग में तंत्रिका तंत्र पर रोग का दुष्प्रभाव होता है। हाथ-पैर की उंगलियों में सुन्नपन का आभास होता है। जाड़े के दिनों में हाथों व पैरों की उंगलियों को हिलाने या उंगलियों का व्यायाम करने से तंत्रिकाओं में शक्ति एवं शरीर के दूरस्थ भागों में रक्त का संचार सुधरता है।
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